सिविल अस्पताल अबोहर में प्राइवेट एंबुलेंस का दबदबा ज्यादा होने से सरकारी एंबुलेंस अस्पताल में खड़ी रहती है। इसके चलते सिविल अस्पताल को आर्थिक नुकसान होेने के साथ-साथ निजी एंबुलेंस वाले मरीजों से अच्छी कमाई कर रहे हैं। जहां सरकारी एंबुलेंस ने पिछले महीने मरीजों को लाने और ले जाने में मात्र 3 से 4 चक्कर लगाए हैं तो वहीं प्राइवेट एंबुलेंस संचालक सैकड़ों चक्कर लगाकर चांदी कूट रहे हैं।
सरकारी एंबुलेंस के ड्राइवर सुखमंदर सिंह ने बताया कि वह कई बार इस समस्या के बारे में सिविल अस्पताल के स्टाफ को बता चुके हैं, लेकिन उन्होंने इसका कोई हल नोहीं निकला। इसके बाद उन्होंने अब सिविल अस्पताल के एसएमओ को इस संबंधी अवगत करवाया। उन्होंने लोगों से अपील की है अस्पताल में 24 घंटे सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध है, जिसमें ऑक्सीजन सहित ट्रेंड स्टॉफ मौजूद रहता है। इधर एसएमओ डॉ. अश्विनी कुमार ने कहा कि पहले जो हुआ उसके बारे में उन्हें नहीं पता है, लेकिन अब सरकारी अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस की एंट्री नहीं होगी।
यदि किसी प्राइवेट एंबुलेंस की एंट्री होगी तो उसका पूरा रिकॉर्ड अस्पताल में होगा। उन्होंने अस्पताल के समस्त स्टाफ को भी कड़े निर्देश दिए हैं कि यदि किसी मरीज को एंबुलेंस की आवश्यकता होगी तो वह सरकारी एंबुलेंस से संपर्क करेंगे। जिससे मरीज और सिविल अस्पताल दोनों को नुकसान न हो। कुछ मजदूर वर्ग के लोग तो प्राइवेट एंबुलेंस कर ही नहीं पाते ऐसे में तो उन लोगों के लिए यह एंबुलेंस वरदान का काम करती है। मगर अस्पताल में खड़ी रहने के कारण यह एक शो पीस का सामान बन कर रह गई है। अगर इसका किसी गरीब को लाभ नहीं मिला तो क्या फायदा।
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