केंद्र सरकार की ओर से लाए गए ‘द फार्मर्स प्रोड्यूस एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) ऑर्डिनेंस-2020’ को लेकर पूरे राज्य में चल रहे किसानों और आढ़तियों के विरोध के बीच सरहदी जिलों अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर के आढ़तियों ने मंगलवार को एकजुटता दिखाते हुए बैठक की और मंडी सुधार ऑर्डिनेंस का जमकर विरोध किया।
अमृतसर आढ़ती वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रधान अमनदीप सिंह छीना, सचिव गुरभिंदर सिंह और लेबर यूनियन के प्रधान राकेश तुली की अगुवाई में आयोजित बैठक में उक्त तीनों जिलों की मंडियों के प्रधान और महासचिव इकट्ठा हुए और मंडी सुधार ऑर्डिनेंस आदि मुद्दों पर चर्चा की। इन लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार ने खेती उपज और मंडीकरण कानून को सीमित करके कार्पोरेट घरानों के हाथ में यह ढांचा सौंपने के लिए ‘द फार्मर्स प्रोड्यूस एंड कॉमर्स ऑर्डिनेंस’ बनाया है।
यह न तो किसान और न ही आढ़ती हितैषी है। इन लोगों का कहना है कि इस ऑर्डिनेंस से किसानों के साथ आढ़ती, कर्मचारी, मजदूर और ट्रांसपोर्टर भी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने सूबा सरकार से इसमें दखल देकर मामले को हल करने की अपील की है। बैठक में आढ़तियों ने प्रस्ताव पास किया है कि उक्त ऑर्डिनेंस का सहारा लेकर अगर कोई शैलर मालिक, आढ़ती या फिर दूसरा खरीदार मंडी से बाहर जिस खरीदता है तो उसका मुकम्मल बहिष्कार होगा।
उन्होंने बताया कि आगे से उक्त खरीदार को दाना मंडियों में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा और उसे मंडी में भी आने नहीं दिया जाएगा। प्रस्ताव में यह कहा गया है कि किसी किसान पर अगर आढ़ती का बकाया है तो उस रकम का मय ब्याज भुगतान का जिम्मा भी बाहर खरीद करने वाले पर होगा। इस दौरान यह भी फैसला लिया गया है कि माझे की मंडी में धान की फसल सबसे पहले आने वाली है और सभी आढ़ती अपने-अपने इलाके के विधायक और मंत्रियों से संपर्क करके अनाज मंडियों की स्थिति में सुधार लाएं
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