(प्रदीप शर्मा)शिक्षा विभाग की ओर से मार्च में स्थगित बोर्ड परीक्षाएं अब ऑनलाइन पैटर्न से ली जा रही हैं, इंटरनेट सुविधा वाले स्मार्ट फोन पर बच्चों को यह परीक्षा देनी है। भले ही बच्चों को शिक्षा में बनाए रखने के लिए एक अच्छी पहल हो लेकिन इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले जरूरतमंद परिवार के स्मार्ट फोन से वंचित बच्चों की ओर से परीक्षा नहीं दे पाने की वजह से वे हीन भावना का शिकार हो रहे हैं। उन्हें अब यह डर सता रहा है कि कहीं ऑनलाइन परीक्षा न दे पाने की वजह से रिपोर्ट कार्ड खराब न हो जाए।
घर में रोजी रोटी का संकट, ऐसे में मोबाइल कहां से कराएं रिचार्ज
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के अभिभावक जरूरतमंद परिवारों से हैं। अनेक के अभिभावक तो दिहाड़ीदार व लेबर क्लास से हैं। गुरसेवक, सुखविंदर, गुरदित्ता, अंजलि, रशपिंदर कौर कहते हैं कि वे ऑनलाइन परीक्षा नहीं दे पाए। इनके अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से काम-धंधा है नहीं, राशन तक तो इधर-उधर से लेकर चूल्हा जला रहे हैं। ऐसे में 200 रुपए का मोबाइल रिचार्ज करवाना संभव नहीं है। कई बच्चों के अभिभावकों के पास तो महंगा स्मार्ट फोन नहीं है, वहीं दूरदराज गांवों में तो नेटवर्क की भी बड़ी समस्या है।
मोबाइल लिंक पर 20 मिनट की परीक्षा
बच्चों या अभिभावकों के रजिस्टर्ड मोबाइल पर लिंक भेजा जा रहा है। उसे खोलकर बच्चे घर बैठे ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हैं। पेपर 20 मिनट का है जिसमें 10 ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन के जवाब देकर सबमिट करना होता है। 24 घंटे में किसी भी समय पेपर दे सकते हैं।
6वीं, 7वीं, 8वीं, 9वीं व 12वीं की हुई ऑनलाइन परीक्षा
ऑनलाइन परीक्षाएं 8 मई से शुरू हुई, 8वीं की गणित, 6वीं की पंजाबी, 7वीं की हिंदी, 9वीं की इंग्लिश तथा 10वीं बोर्ड की एसएसटी व साइंस की परीक्षा हुई। 12 मई को 12वीं बोर्ड की इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री की ऑनलाइन परीक्षा हुई। एग्जाम में हासिल अंकों को सीसीई में जोड़ा जाएगा।
परीक्षाएं बकाया होने से घोषित नहीं हो पा रहे रिजल्ट
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 23 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है। इसके चलते बिना परीक्षा रिजल्ट घोषित नहीं करने से बच्चे अगली कक्षाओं में प्रमोट नहीं किए जा पा रहे जबकि परीक्षा मुकम्मल करने वाली कई कक्षाओं के ऑनलाइन रिजल्ट घोषित करके बच्चे अगली कक्षाओं में दाखिल कर लिए गए हैं।
अधिकांश ने दी परीक्षा, कइयों को हुई दिक्कत
ऑनलाइन परीक्षा तो शिक्षा विभाग का ट्रायल है, जिसमें उनके जिले के ज्यादातर बच्चों को अध्यापकों ने फोन करके परीक्षाएं दिलाई। अभिभावकों के पास फोन न होने पर पड़ोसी अथवा रिश्तेदार के फोन पर लिंक भेजा गया। हालांकि कुछेक बच्चों को यह प्राब्लम फेस करनी पड़ी।इकबाल सिंह, डिप्टी डीइओ
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