सूबे में शुक्रवार की सुबह किसानों के लिए परेशानियां लेकर आईं। कोरोना से बचाव के तमाम उपाय अपनाते हुए मंडियों में पहुंचे किसान को मौसम के बदले तेवरों का भी सामना करना पड़ा। कोरोना से बचाव को प्राथमिकता में रखने वाले प्रशासन व आढ़तियों का ध्यान कुदरत की ओर नहीं होने के चलते अपने बच्चों की तरह पाली फसल को बचाने के लिए किसान मंडियों में मोर्चा लेते दिखे। घर में बोरियों से बनाई जुगाड़ु तिरपालों से गेहूं को बचाने की कोशिश की गई।
जबकि सूबे के कई जिलों में कई जगह सुबह से ही बूंदाबांदी व तेज हवाओं के चलने से किसान परेशान हुए। मलोट के गांव लंबी, वनवाला, मेहना, भीटीवाला, ढाणी तेलिया दी, कंदखेड़ा सहित विभिन्न गांवों में ओले गिरने व बारिश से गेहूं की पकी फसल समेत सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है।
आज भी आंधी के आसार, 22 तक ऐसा ही रहेगा मौसम
दूसरी तरफ चंडीगढ़ के वेदर स्टेशन पर डायरेक्टर डॉ सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर महीन बूंदाबांदी हो सकती है। मध्यम गति की हवाएं चलेंगी। अभी 22 अप्रैल तक इसी तरह का मौसम रहेगा। लेकिन दोपहर को तीखी धूप का असर बरकरार रहेगा।
इसी दौरान जालंधर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन में हवाएं चलने से शाम 4:00 बजे टेंपरेचर में कमी दर्ज की है। जहां 1 दिन पहले 35 डिग्री टेंपरेचर चल रहा था आज वह 27 पर आ गया। रात का टेंपरेचर 20 डिग्री रिकॉर्ड हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार अभी मुख्य तौर पर दोपहर को तीखी धूप का सामना करना पड़ेगा।
कटाई शुरू होते ही कम हुई हवा की गुणवत्ता
गेहूं की कटाई शुरू होते ही खेतों से उठने वाली धूल से एयर क्वालिटी इंडेक्स फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। 4 दिन पहले जहां हवा का क्वालिटी इंडेक्स 35 चल रहा था, वह शुक्रवार को बढ़कर 58 पहुंच गया है। यानी कि प्रति घन मीटर हवा में 58% पोलूशन के कण हैं। फिलहाल वाहनों से पैदा होने वाली गैसों की बजाए धूल के कणों के कारण हवा खराब हो रही।
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