सरकार ने रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) से वाहनों की आरसी, चेसिस नंबर, कलर या फिर नाम में कोई करेक्शन करने की पावर छीन ली है। अब वाहन दस्तावेज करेक्शन के लिए फाइल को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट चंडीगढ़ भेजकर अप्रूवल लेनी पड़ेगी।
स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीए) से परमिशन मिलने के बाद ही दस्तावेजों में सुधार हो पाएगा। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के नए आदेश से जहां आरटीए कार्यालयों में जालसाजी एवं घूसखोरी रुकेगी, वहीं वाहन मालिकों को करेक्शन कराने के लिए कम से कम 3 महीने आरटीए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे।
घूसखोरी कम हुई... हर माह करेक्शन को आते हैं 1300 आवेदन
आरटीए कार्यालय में हर महीने 1200 से 1300 के बीच सभी प्रकार के वाहनों के करेक्शन की फाइलें आती हैं। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के द्वारा एक माह पूर्व जारी आदेश के बाद लोग आरटीए कार्यालयों के धक्के खाने को मजबूर हैं। पहले यह करेक्शन आरटीए के माध्यम से ही जिले स्तर पर हो जाते थे, लेकिन सरकार को लंबे समय से विभिन्न प्रकार के वाहनों में होने वाले करेक्शन के नाम पर जालसाजी होने की शिकायतें मिल रही थी, जिसके बाद सरकार के निर्देश पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने सभी जिलों के आरटीए से करेक्शन की करने की पावर ले ली है।
डिपार्टमेंट की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया कि वाहनों में किसी भी प्रकार का करेक्शन के लिए फाइल पहले चंडीगढ़ में भेजी जाएंगी, फिर यहां से अप्रूवल होने के बाद ही आरटीए फाइलों में करेक्शन कर सकेंगे। इस बाबत आरटीए सेक्रेटरी बरजिंदर सिंह का कहना है कि विभाग से अप्रूवल मिलने के बाद ही अब आरसी या फिर अन्य कमियां सही हो पाएंगी।
अपराधी घटनाओं को देते हैं अंजाम... जानकार बताते हैं कि ज्यादातर अराजक तत्व गाड़ियों के नंबर, नाम या फिर उसके चेसी नंबर अथवा वाहन के रंग में गड़बड़ी करके वारदातों को अंजाम देते हैं। ऐसे में वाहनों की जानकारी या फिर ऑनर्स के नाम में गलत होने पर पुलिस को तहकीकात में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में खुलासा हुआ है कि यह सब आरटीए दफ्तर में तैनात कर्मचारियों की कहीं न कहीं मिलीभगत से होता है।
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