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मोटी फीस से अभिभावक परेशान, डिमांड पर बढ़ेंगी सीटें

काेरोना महामारी से बचाव और रोकथाम के लिए सरकार की ओर से लगाए कर्फ्यू और लॉकडाउन में कई लोग बेरोजगार हो गए। कई लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है, जिस कारण वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने में असमर्थ हैं।

यही नहीं कुछ लोग जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से खुद ही निकाल रहे हैं। मोटी फीस न दे पाने की वजह से कुछ पेरेंट्स बच्चों का दाखिला अब सरकारी स्कूल में करवाना चाहते हैं।

इसके लिए एजुकेशन डिपार्टमेंट ने सरकारी स्कूलों में पहली से 9वीं क्लास तक सीटें बढ़ाने का फैसला लिया है। कौन से स्कूल में कितनी सीटें बढ़ेंगी, यह डिमांड पर आधारित होगा।

स्कूल प्रिंसिपल से यह डाटा मंगवाया जा रहा है कि उनके पास कितने आवेदन आ रहे हैं। इसके बाद ही बताया जाएगा कि कहां कितनी सीटें बढ़ाई जाएंगी।

एजुकेशन डिपार्टमेंट के निर्देशों पर अब सरकारी स्कूलों में 50 प्रतिशत स्टाफ ने आना शुरू कर दिया है।

पहली से 9वीं क्लास तक सीटें बढ़ाने का फैसला सरकारी स्कूलों में 50 प्रतिशत स्टाफ आना शुरू

अब सरकारी स्कूलों में एडमिशन प्रोसेस शुरू कर दिया गया है। डिपार्टमेंट ने प्रिंसिपल काे एक हफ्ते में डिटेल भेजने काे कहा है।

बताना होगा कि किस क्लास में कितने स्टूडेंट हैं और कितने स्टूडेंट ने किस-किस क्लास में एडमिशन के लिए अप्लाई किया है।

अगर कोई पेरेंट्स अपने पास के सरकारी स्कूल में बच्चे का दाखिला कराना चाहता है तो स्कूल में गेट पर एप्लीकेशन देनी होगी।

इसमें बच्चे की डिटेल, कौन सी क्लास में एडमिशन लेना, एड्रेस और कांटेक्ट नंबर देना होगा। बाद में टीचर खुद फोन पर पेरेंट्स से बात करेंगे।

काेरोना के चलते स्कूल के मेन गेट पर आवेदन लिए जा रहे हैं। प्रिंसिपल काे कहा गया है कि किसी भी स्टूडेंट काे एडमिशन के लिए मना न करें। रिक्वायरमेंट के अनुसार स्कूलों में सीटें बढ़ेंगी।



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