भवन निर्माण करने वाले ठेकेदार के साथ काम करने वाला बिहार से आया नौजवान और उसके चाचा रामनारायण यादव, सोढल चौक में तीखी दोपहर में बैठकर किसी संस्था का इंतजार कर रहे थे, जो उन्हें राशन दे जाए। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी और लोग सोढल चौक में लॉकडाउन के कारण बंद पड़ी दुकानों के बाहर प्लेटफार्म पर आकर बैठने लगे। धीरे-धीरे यह गिनती 10 पहुंच गई। केवल सोढल चौक ही नहीं बल्कि दोआबा चौक, पठानकोट बाईपास चौक में भी इसी तरह बैठकर श्रमिक राशन देने वालों का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस के जवान नाकाबंदी के दौरान इन सभी लोगों की सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करवाते हैं। साथ ही राशन देने वालों को प्रेरित करते हैं।
सिटी के चौराहों की पहचान हर सुबह लगने वाली मजदूरों की भीड़ के तौर पर भी होती है, इन्हें भवन निर्माण करवाने वाले लोग लेबर चौक कहते हैं। औद्योगिक मजदूरों को उनके मालिकों ने वेतन का एडवांस देकर और राशन देकर मदद उपलब्ध करवाई। राशन को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी भवन निर्माण में काम करने वाले मजदूरों की है जो रोजाना पैसा कमा कर घर का खर्चा चलाते हैं। यही वजह है कि यह लोग रोजाना राशन के लिए चौकों में बैठकर इंतजार कर रहे हैं।लॉकडाउन के चलते अपने गांव को पैदल निकले मजदूरों में कई वापस लौटेजब लॉकडाउन शुरू हुआ था तो घबराकर अपने प्रदेशों को पैदल ही चलने के लिए मजदूर में से कई ऐसे भी हैं जिन्होंने वापस आने का फैसला किया था।
राशन लेने निकले मजदूर बताते हैं समझदार लोग वापस आए क्योंकि, रात को अपराधियों का डर था और ऊपर से जगह-जगह पुलिस उन्हें वापस जाने के लिए कह रही थी। रास्ते में खाना और आराम करने की भी दिक्कत थी। जिन श्रमिकों के घर हिमाचल या हरियाणा में थे वह तो पहुंच गए लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले कई मजदूर वापस आए।राशन के लिए बैठे मजदूरों की दुविधामजदूरों में शामिल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों की है, जो इंडस्ट्रियल एरिया के कुछे क्वार्टरों तक राशन देने वाली संस्थाएं नहीं पहुंच पाती हैं। इसीलिए उन लोगों को बाहर आकर चौक में बैठना पड़ रहा है।
इंडस्ट्रियल संगठनों की मांग- श्रमिकों का वेतन इंप्लाई इंश्योरेंस कार्पोरेशन के खाते से दे सरकार
सिटी के इंडस्ट्री संगठनों ने सरकार से मांग की है कि लॉकडाउन के दौरान जो उन्हें स्टाफ की छुट्टियों के बावजूद, वेतन भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है, ये आदेश वापस लिए जाएं। सिटी के इंडस्ट्री संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार से मांग की है कि इंप्लाइज इंश्योरेंस कार्पोरेशन के खाते से श्रमिकों का वेतन जमा कराया जाए। जालंधर सिटी में करीब एक लाख लोगों को इंडस्ट्री में रोजगार दिया हुआ है, जो लॉकडाउन के कारण घर में ड्यूटी पर बुलाई जाने का इंतजार कर रहे हैं। जालंधर के इंडस्ट्री संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार को लेटर लिखे हैं। संगठनों ने कहा कि फैक्ट्रियां पूरी तरह से बंद होने के बाद कोई आमदनी नहीं हो रही है, सरकार ने जो लॉकडाउन करवाया है, इस दौरान फैक्ट्रियों के श्रमिकों और स्टाफ का वेतन खर्च सरकार को उठाना चाहिए।
इंप्लाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन में हर महीने इंपलॉयर और इंप्लाइ का जो पैसा कटवाते हैं, उसमें प्रावधान होता है कि बीमारी के वक्त वेतन का 70 फीसदी तक यह कारपोरेशन भुगतान करेगी। इस संदर्भ में नॉर्दर्न चेंबर ऑफ स्माल इंडस्ट्रीज, जालंधर इंडस्ट्रियल फोकल पॉइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन, उद्योग नगर मेन्यूफेक्चरर एसोसिएशन और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार को लेटर भेजे हैं। इस संबंध में जालंधर इंडस्ट्रियल फोकल पॉइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नरिंदर सिंह सग्गू ने कहा कि जालंधर की इंडस्ट्री में जो मुद्दा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने रखा, इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लेटर लिखा है।
नरिंदर सिंह सग्गू ने कहा कि हमें केंद्र सरकार के रिस्पांस का बेसब्री से इंतजार है। इंडस्ट्री संचालकों ने लॉकडाउन के बावजूद अपने स्टाफ को राशन और सैलरी का एडवांस उपलब्ध करवाया है। इसका मकसद श्रमिक वर्ग की समस्याओं को हल करना ही है, लेकिन सरकार जो पूरा वेतन इंडस्ट्री पर डालना चाहती है, उसे उठाने की ताकत पंजाब की इंडस्ट्री नहीं रखती हैं। अगर सरकार इस समस्या का हल नहीं करेगी तो इंडस्ट्री बंद हो जाएगी, जिससे रोजगार के मौके उपलब्ध कराने का साधन भी खत्म हो जाएंगे।
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