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100 करोड़ का कारोबार प्रभावित, बैटरी-इनवर्टर कंपनियों का सीजन हो रहा खराब, कूलर निर्माता भी मंदी में

लॉकडाउन खोलने के बाद सिटी की इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को खोए हुए समय के ऑर्डर वापस मिलने की पूरी उम्मीद है, लेकिन बैटरी और इनवर्टर बनाने वाली कंपनियों के लिए गर्मी का पूरा सीजन घाटे का सौदा बन गया है। मार्च और अप्रैल में इस इंडस्ट्री के पास नई डिमांड के ऑर्डर आते हैं और फिर गर्मी का पूरा सीजन खुलकर बिक्री होती है, लेकिन इस बार ना तो नए ऑर्डर आए और ना ही प्रोडक्शन संभव है। आर्थिक संकट में फंसे परिवारों में इस बार पुराने बैटरी और इनवर्टर को बदलने की मार्केट भी ठंडी रहेगी, इससे बैटरी और इनवर्टर निर्माता कंपनियां घोर संकट में फंस गई हैं। यही हाल कूलर बनाने वाले यूनिटों का है।
बैटरी और इनवर्टर की बिक्री जालंधर की 100 से अधिक डीलरशिप के लिए पंजाब के विभिन्न शहरों के अलावा हिमाचल, राजस्थान और हरियाणा के बॉर्डर एरिया में होती है। बैटरीज़ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और घरों में बिजली बैकअप के लिए इस्तेमाल होती हैं। घरेलू बैटरी- इन्वर्टर निर्माताओं के लिए बिक्री का सबसे अच्छा मौका गर्मी के सीजन में होता है, लेकिन इस बार पंजाब का 100 करोड़ रुपए सालाना वाला सारा व्यापार चौपट हो गया है। कारोबारी बताते हैं कि वर्ष 2000 और वर्ष 2009 में मंदी के दिनों में भी कारोबार पर इतना बुरा वक्त नहीं आया था। इस बार जैसे ही मार्च महीने में गर्मी के सीजन की तैयारी शुरू की गई, उसी वक्त कोविड-19 की मार पड़ गई है।

कुम्हारों के मटके भी नहीं बिक रहे

जहां बैटरी इनवर्टर और कूलर का गर्मी के सीजन का बाजार पूरी तरह से संकट में आ गया है, उसी बीच कुम्हारों के लिए दैनिक खर्च उठाना भी मुश्किल का सौदा बन गया है। गाजी गुल्ला रोड पर सुनसान सड़क पर पानी के मटके बेच रहे कुम्हारों ने कहा कि सेल महज 25 फीसदी रह गई है।

लॉकडाउन से गर्मी सीजन का चक्र खराब हुआ

युवा बैटरी निर्माता अमित मल्होत्रा बताते हैं कि अभी जो लॉक डाउन हुआ है उससे गर्मी के सारे सीजन का साइकिल खराब हो गया। अमित मल्होत्रा बताते हैं कि ऑटोमोबाइल सेक्टर पहले ही मंदी में चल रहा है, जिसके बाद लोकल बैटरी और इनवर्टर निर्माताओं के लिए अप्रैल से लेकर जुलाई तक बिक्री का सही मौका पैदा करते हैं, जिन हिस्सों में बिजली के कट ज्यादा लगते हैं वहां के कस्बों और गांवों में खूब बिक्री होती है, जबकि बड़े शहरों में बैटरी और इनवर्टर हर घर दुकान और दफ्तर में बैकअप का काम करते हैं। इसलिए गर्मी की हर सीजन में शहरों कस्बों और गांवों में पुराने बिजली बैकअप सिस्टम बदले जाते हैं जिससे इंडस्ट्री को ऑर्डर मिलते हैं।

बिल, टैक्स के खर्चे बरकरार, सेल 0%

दूसरी तरफ बैटरी बैकअप विक्रेता गुरिंदर पाल सिंह कहते हैं कि बाकी तमाम तरह की इंडस्ट्री की लॉकडाउन खुलने के बाद एकदम से प्रोडक्शन तेजी में आएगी, लेकिन बिजली बैकअप मार्केट को यह तेजी लाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ेगी। हमारे पास दुकान का किराया, बिजली का बिल, टैक्स रिटर्न और मुलाजिमों के खर्चे बरकरार हैं लेकिन सेल 0% है। कूलर फैन विक्रेता राजीव आनंद कहते हैं कि लोअर मिडिल क्लास में हमारे प्रोडक्ट की सबसे ज्यादा बिक्री होती है।

उन्हें लॉकडाउन के बीच वेतन भी कटौती करके मिल रहा है। सरकार ने गैर कोविड-19 वाले इलाकों में जरूरी सेवाओं के बाजार खोलने की बात कही है, लेकिन जिस तरह से जालंधर में केस बढ़ रहे हैं, उससे हम अंदाजा नहीं लगा सकते कि कब दुकानें खुलेंगी। डेजर्ट कूलर और छत के पंखे मार्च-अप्रैल में गर्मी का सीजन फोकस करके तैयार होते हैं, इस बार सीजन शुरू होने से पहले ही अटक गया है।



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Business of 100 crores affected, battery-inverter companies getting in bad season, cooler manufacturer also in recession


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