(हरपाल रंधावा) तरनतारन, गुरदासपुर और अमृतसर जिले के 15 शहरी क्षेत्र और 40 गांवों तक जहरीली शराब पहुंच चुकी थी। अब तक 87 लाेगों की मौत हो चुकी है। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि एल्कोहल को इन तीन जिलों में पहुंचाने वाला नेक्सेस एक ही था। शराब बनाने की ज्यादातर भट्ठियां दरिया या छप्पड़ों के किनारे हैं। ड्रम में भरकर स्टाॅक को पानी में छिपा कर रखते हैं।
ये 3700 रुपए की 50 लीटर एल्कोहल खरीदकर उससे 15000 की शराब बना लेते थे। यह शराब इतनी तेज होती है कि अगर उसमें 10 गुना पानी मिलाकर किसी बर्तन में डाल दें तो बर्तन इतना गर्म हो जाता है कि उस बर्तन को 20 मिनट से पहले हाथ लागने पर जल सकते हैं। शराब इतनी घातक है कि आग कई मीटर से दूरी से खींच लेती है। तस्कर थोक में 650 की 5 बोतल बेचते थे।
छोटे ग्राहक को 200 रुपए बोतल हिसाब से। शराब का नशा करने वाले मानते हैं कि शराब में इतना ज्यादा नशा है, वह केवल गिलासी ही पीते हैं। सवाल उठ रहे हैं कि माझा में एल्कोहल का इतना बड़ा धंधा आखिर कहां से कौन करता था। तरनतारन व बटाला में दो बड़ी डिस्टलरी हैं। कहीं ऐसा तो नही कि यहां से एल्कोहल के ट्रक चोरी होकर गांवों तक पहुंचते हों।
पुलिस इस ओर सोचने में भी पुलिस डर रही है क्योंकि तरनतारन में डिस्टलरी राणा की है। बटाला में सरना की। दोनों पावरफुल नेता हैं। इधर, पंजाब में जहरीली शराब सप्लाई से तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर व बटाला में हुई मौतों का आंकडा लगातार बढ़ता जा रहा है। अकेले तरनतारन में मरने वालों की संख्या 63 हो गई है। मरने वालों में ज्यादातर मजदूर हैं। इनमें एक एसजीपीसी मुलाजिम और एक ज्योतिषी भी था।
इसलिए शराब पीनेे से होती है मौत
इथाइल एल्कोहल का प्रयोग शराब बनाने में किया जाता है। इसके लिए इसकी तीव्रता घटानी पड़ती है। इसी तरह का दूसरा पदार्थ मिथाइल एल्कोहल होता है, जो जहरीला होता है। चूंकि, दोनों का मिलता-जुलता नाम है और ‘एल्कोहल' शब्द भी जुड़ा है, इसलिए तस्कर भ्रम में मिथाइल एल्कोहल में पानी मिलाकर शराब के रूप में बेचते हैं। मिथाइल एल्कोहल का प्रयोग दिमागी कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे शरीर में सुन्नपन व अंधेपन की समस्या आ सकती है। इसके सेवन मौत का कारण बन सकती है।
लैबोरेटरी नहीं होती, एल्कोहल की तीव्रता नहीं कम कर पाते तस्कर
प्रमाणित डिस्टलरी जहां पर शराब बनाई जाती है वहां लैब होती है। यहां पर विशेषज्ञ मानक के अनुरूप निश्चित मात्रा में इथाइल एल्कोहल की तीव्रता कम करते हैं। दूसरी तरफ, कच्ची शराब बनाने वालों के पास एल्कोहल की तीव्रता कम करने का मैकेनिज्म नहीं होता है। मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों से इथाइल और मिथाइल एल्कोहल दोनों सप्लाई होते हैं। कई बार मिथाइल एल्कोहल को टैंकर से निकालकर तस्करों को बेच देते हैं। कुछ अवैध शराब बनाने वाले लोग खरीद लेते हैं। बाद वे शराब बनाने की कोशिश करते हैं।
अब 3 इनोवा, ट्रैक्टर, करोड़ों की संपत्ति का मालिक, पुलिस भी नहीं लगाती हाथ
पंडोरी गोला में अब तक 6 मौतें जहरीली शराब पीने से हो चुकी है। मरने वाले सभी युवा है। पुलिस ने जहां के एक शराब तस्कर फीरा (कशमीर सिंह) को पकडा भी है। यह ऐसा तस्कर है जो, लगभग 10 साल से शराब के धंधे में जुडा है। इनका धंधा ज्यादातर थोक का था। पुलिस ने कभी उसे पकडा तक नही। इसकी बडे कैन में (अल्कोहल) शराब की खेप आती थी।
गांव के लोगों का कहना है कि यह दलित परिवार से सबंधित है, पहले यह दिहाडी का काम करता था, अब 3 इनोवाल गाडियों व अन्य वाहनों का मालिक बन गया है। साल 2013 में इसने गांव से सरंपच का चुनाव भी लडा था, लेकिन हार गया था। अब कहता था, एक बार एमएलए बनना है। गांव निवासियों ने अपना नाम छुपाते हुए कहा कि गांव में लगभग 25-30 लोग शराब का धंधा करते हैं। पुलिस ने कभी किसी को पकडा ही नहीं।
एक बोतल से बना लेते हैं 10 बोतल
गांव पंडोरी गोला के एक व्यक्ति ने कहा कि वह भी इस धंधे में जुड़ा था। वह अपनी शराब तैयार कर बेचता था। अल्कोहल सुबह 4 बजे उतरती है। एक बोतल से 10 बोतल बन जाती हैं। शराब उबलती है। उसे जिस बर्तन में डाला जाए 10 बोतल करने के बाद भी उसे 20 मिनट हाथ नहीं लगता। शराब लेने वाले ग्राहक उंगली पर शराब डाल कर दूर से माचिस से आग लगाते हैं, आग पेट्रोल की तरह दूर से शराब को आग पकड़ लेती है तो ग्राहक देख कर खुश हो जाता है। ऐसी शराब पीने से सीधा असर आंखों पर होता है, ज्यादातर की मौत भी पहले आंखों से न दिखने व बाद तड़पने से हुई है।
मरने वाले ज्यादातर दिहाड़ीदार मजदूर
जहरीली शराब से मरने वालों में ज्यादातर मजदूर थे। कोई एफसीआई व कोई अन्य एजेंसी में काम करता था। कोई रिक्शा चालक था, कोई अचार बेच कर गुजारा करता था। गांव बचड़े में तीन की मौत हुई है, एक आंखों से अंधा हो गया है। चारों मजदूर थे। गांव संघा में दो भाई ही चल बसे हैं। दोनों शराब लेकर आने के लिए पीकर चेक करने लगे थे, लेकिन शराब जहरीली होने से दोनों घर पहुंचते ही दम तोड़ गए।
तरनतारन के इन गांवों व मोहल्ले से हैं मरने वाले...12 गांव और शहर के 5 मोहल्लों से हैं। जिनमें गांव पंडोरी गोला, बचड़े, संघा, नोरंगबाद, कल्ला, कंग, कक्का कंडियाला, भुलर, मलिया, कद गिल, मल मोहरी, जोधपुर शामिल है। शहर से गुरु तेग बहादर नगर, सच्चखंड रोड, मोहला जसवंत सिंह, मुरादपुर, गोकलपुर व गली माता ज्वाला जी के थे।
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