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रेतीली जमीन में सीधी बिजाई तकनीक से बचें : डॉ. मनदीप

लेबर की कमी के चलते कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को धान की सीधी बिजाई दरमियानी और भारी जमीन में करने की अपील की है। कृषि विज्ञान केंद्र खेडी के एसोसिएट डॉयरेक्टर (ट्रेनिंग) डॉ. मनदीप सिंह ने कहा कि रेतीली जमीन में इस तकनीक के प्रयोग से परहेज किया जाए। सीधी बिजाई के लिए पहले खेत को लेजर लेवलर कराह से समतल कर देना चाहिए। वत्र आने पर दो बार सुहागा मार कर तुरंत सीधी बिजाई कर देनी चाहिए।

कम और दरमियानी समय में पकने वाली किस्मों की काश करनी चाहिए। धान की परमल किस्म पीआर 126, पीआर 114, पीआर 121, पीआर 122, पीआर 127 की बिजाई जून के पहले पखवाड़े और बासमती किस्म पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1718 की बिजाई जून के दूसरे पखवाड़े में करनी चाहिए। सीधी बिजाई के लिए 8 किलो बीज(अधिक से अधिक 10 किलो) काफी है। इससे ज्यादा मात्रा में बीज प्रयोग करने पर फसल घनी होने के कारण तने का गलाव आदि बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

बिजाई से पहले बीज को 8 घंटे (अधिक से अधिक 12 घंटे) पानी में भिगोकर बाद में सुखाकर दवाई के साथ शोध कर लेनी चाहिए। बिजाई के लिए लक्की सीड ड्रिल के प्रयोग को पहल देनी चाहिए, जो धान की बिजाई व नदीन नाशक का छिड़काव करती है। टेढी प्लेट वाली धान बीजने वाली ड्रिल से भी बिजाई की जा सकती है। जिसके तुरंत बाद नदीन नाशक का छिड़काव कर देना चाहिए।



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