सिविल अस्पताल में अब संदिग्ध मरीज का कोरोनावायरस सैंपल भेजने से पहले रैपिड एंटी बॉडी बेस्ड ब्लड टेस्ट किया जाएगा। सिविल अस्पताल में टेस्ट उन मरीजों का होगा जिन्हें पिछले सात दिन से खांसी बुखार और जुकाम की शिकायत होगी। अस्पताल को 500 रेपिड टेस्ट किट्स मिली हैं।
आईडीएसपी की लेबाेरेट्री के माइक्रो बायोलॉजिस्ट हरकंवल सिंह ने बताया कि रैपिड डायग्नाॅस्टिक टेस्ट किट के जरिये संदिग्ध मरीजों के शरीर में बन रहे कोरोनावायरस के ई-जींस के बारे में पता लगाया जाएगा। यह टेस्ट उसी व्यक्ति का होगा जिसे पिछले 7 दिन से खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ गले में खराश की शिकायत हाेगी। रैपिड टेस्ट में अगर कोरोनावायरस के ई-जींस सामने आते हैं तो मरीज के टेस्ट को अमृतसर लेबाेरेट्री में रियल टाइम-पोलीमीरेस चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। अगर मरीज का रैपिड टेस्ट निगेटिव भी आता है तो उसे घर में ही क्वारेंटाइन किया जाएगा।
10 दिन बाद दोबारा टेस्ट होगा। अगर तब टेस्ट पॉजिटिव आता है तो मरीज को अस्पताल में आइसोलेट किया जाएगा। सिविल अस्पताल मे यह सुविधा होने के बाद अब अस्पताल की तरफ से उन्हीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों के टेस्ट भेजे जाएंगे जो लोग पॉजिटिव मरीज के सीधे संपर्क में आए होंगे। रैपिड टेस्ट शुरू होने के बाद अब अस्पताल में स्क्रीनिंग करवाने वालों के भी अस्पताल में ही टेस्ट हो सकेंगे।
मेस ब्वॉय समेत एलपीयू की युवती के संपर्क में आए 39 की रिपोर्ट निगेटिव
मंगलवार को एलपीयू की मेस में काम करने वाले युवक की सांस लेने में तकलीफ होने के कारण हुई माैताें के बाद लिए सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, एलपीयू के 38 स्टूडेंट्स की रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, कुछ दिन पहले सिविल अस्पताल के 7 डॉक्टरोंकी रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। बता दें कि सिविल अस्पताल में इस समय 18 नर्सों को होम क्वारेंटाइन किया गया है। वहीं, तलवाड़ अस्पताल के डॉक्टरों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
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