जालंधर (अनुभव अवस्थी). पंजाब कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक पद्मश्री परगट सिंह ने माइनिंग, नशा और शराब माफिया सक्रिय होने की बात कहकर अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल कर खड़ा दिया, जिसके बाद सूबे की सियासत अचानक गरमा गई है। जालंधर आए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सहयोगी कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी ने बंद कमरे में विधायक परगट सिंह को मनाने और समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन परगट सिंह ने बैकफुट पर आने को तैयार नहीं दिखे। मंत्री सोनी नेकहा कि उन्हें पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पत्र सीएम को लिखा तो जवाब भी सीएम ही देंगे। मैं क्या कह सकता हूं। हालांकि मंत्री सोनी चुटकी लेते हुए कहा कि शायद विधायक जी को उनके हिस्से की ग्रांट कुछ कम मिली होगी, इसलिए नाराज हो गए हैं। उन्हें मना लिया जाएगा।
विधायकों को मनाने के लिए आए मंत्री
जिला शिकायत निवारण कमेटी की मीटिंग पहले से 18 फरवरी को होनी है, यह तय नहीं था। सूत्र बताते हैं कि सरकार के निर्देश पर दो-तीन दिनों में मीटिंग फाइनल हुई। इसके पीछे की तह में जाएं तो विधायक परगट सिंह का पत्र लीक होने के बाद इसकी हकीकत परखने के लिए मंत्री को दूत बनाकर कर भेजा। चूंकि मंत्री ओपी सोनी जिले के प्रभारी हैं, इसलिए वह लगातार अपने विधायकों से संपर्क करके उन्हें टटोला। इसके अलावा मीटिंग के बहाने विधायकों की नारागियां दूर करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने मीटिंग खत्म होते ही विधायकाें ने बंद कमरे में बात की। जिसमें विधायक प्रगट सिंह, विधायक राजिन्दर बेरी और सुशील रिंकू मौजूद रहे।
नई नहीं है परगट की नाराजगी
विधायक परगट सिंह की नाराजगी आज की नहीं है, इसकी शुरुआत 2017 के विधानसभा चुनाव में हो गई थी, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने चहेते जगबीर सिंह बराड़ को कैंट विधानसभा हलके से टिकट देना चाहते थे। लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू के सहयोग से कैंट से टिकट की जंग परगट सिंह को मिली और बराड़ को नकोदर में भेज दिया गया था। परगट सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत गए और नया एरिया होने के चलते बराड को हार मिली।
सियासत बदली, आउट हुए परगट
कांग्रेस सरकार बनते ही सिद्धू को सरकार में निकाय मंत्री बनाया गया तो उनके बेहद करीबी परगट सिंह पंजाब की सियासत में पॉवरफुल हो गए। परगट सिंह सिद्धू के साथ हर जगह प्रचार करने के लिए जाते रहे। पिछले साल अचानक समय बदला और सिद्धू व कैप्टन के बीच चले युद्ध के बाद सिद्धू पंजाब की सियासत से आउट हो गए हैं। सिद्धू के बाहर होते ही परगट सिंह भी अलग थलग पड़ गए। हालांकि परगट सिंह ने सिद्धू को लेकर कभी काेई बयानबाजी नहीं की। लेकिन उनके साइड लाइन होते ही कैप्टन ने अपने चहेते जगबीर बराड़ को पंजाब स्तरीय चेयरमैनी देकर दोबारा पॉवरफुल कर दिया है। फिलहाल पंजाब विधानसभा चुनाव में करीब दो साल का समय पड़ा होने के बाद भी अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है।
अपने स्टैंड पर कासम हैं परगट
ताजा प्रकरण में कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि दो महीने पहले उन्होंने एक पत्र सीएम को लिखा था, जिसमें उन्होंने सूबे में नशा रोकने, माइनिंग और शराब माफिया के सक्रिय होने सहित कई मुददों पर अपनी ही सरकार की विफलता के बारे में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह बताया था। उन्होंने लिखा था, माफिया पर नकेल कसने की जरूरत है, नहीं तो पूर्व और इस सरकार में अंतर ही क्या है। इस बात पर वह कामय हैं।
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